Jharkhand के Rachi में छात्रों के विधानसभा घेराव के बाद भी नहीं बनी बात, झारखंड में सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े विवाद को लेकर कई दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को उस समय और गरमा गया, जब बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा का घेराव करने पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हुई और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। इस कार्रवाई के बाद छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया है। अब इसी लाठीचार्ज के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को झारखंड बंद का आह्वान किया है।
17वें दिन भी जारी रहा छात्रों का आंदोलन
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन अब 17वें दिन में पहुंच चुका है। लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे छात्र परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में वे अपनी जिंदगी के कई साल लगा देते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हों, तो उनके भविष्य को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।
रांची में सोमवार को छात्रों ने अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए विधानसभा घेराव का कार्यक्रम बनाया था। बड़ी संख्या में छात्र वहां पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए और पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए बल प्रयोग किया। लाठीचार्ज की खबर सामने आने के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई।
लाठीचार्ज के बाद बीजेपी ने बुलाया झारखंड बंद
छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर बीजेपी ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने लाठीचार्ज के विरोध में आज यानी मंगलवार को झारखंड बंद का आह्वान किया है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे छात्रों के साथ सरकार को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था, न कि उनके खिलाफ बल प्रयोग करना चाहिए था।
बंद के ऐलान के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य में इसका कितना असर दिखाई देता है। छात्र आंदोलन पहले ही सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है और राजनीतिक दल के सीधे तौर पर इसमें उतरने से मामला और संवेदनशील हो गया है।
विधानसभा घेराव के दौरान क्यों बढ़ा तनाव?
सोमवार को छात्र विधानसभा की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोकने की कोशिश की। इसी दौरान स्थिति बिगड़ती चली गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ने के बाद लाठीचार्ज किया गया। इस कार्रवाई के बाद छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई।
छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है। यही वजह है कि विधानसभा घेराव के जरिए वे सीधे सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहते थे। दूसरी तरफ प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से की शांति की अपील
घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से शांत रहने की अपील की। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से देख रही है। सरकार की ओर से बातचीत और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया गया है।
हालांकि, छात्रों के बीच अभी भी असंतोष कम होता दिखाई नहीं दे रहा है। आंदोलनकारी चाहते हैं कि केवल आश्वासन देने के बजाय उनकी मांगों पर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई की जाए। छात्रों के लिए यह मुद्दा सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि उनके करियर और भविष्य से जुड़ा हुआ है।
छात्रों के लिए यह लड़ाई सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए एक परीक्षा सिर्फ कुछ घंटों का पेपर नहीं होती। इसके पीछे महीनों और कई बार वर्षों की मेहनत, आर्थिक खर्च और परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। यही कारण है कि जब किसी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता या गड़बड़ी के आरोप लगते हैं, तो छात्रों के बीच बेचैनी पैदा होना स्वाभाविक है।
झारखंड में चल रहा यह आंदोलन भी इसी बेचैनी की तस्वीर दिखाता है। छात्र चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो और अगर कहीं गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच हो। उनका मानना है कि मेहनत से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
छात्र आंदोलन, सरकार की प्रतिक्रिया और बीजेपी के झारखंड बंद के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस विवाद का समाधान कब और कैसे निकलेगा। अगर सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच जल्द सार्थक बातचीत होती है, तो तनाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है। लेकिन अगर मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ, तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है।
फिलहाल रांची में हुए लाठीचार्ज ने JPSC-JSSC विवाद को एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। छात्रों की नाराजगी के साथ विपक्ष का विरोध भी तेज हो गया है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती सिर्फ कानून-व्यवस्था संभालने की नहीं, बल्कि युवाओं के भरोसे को वापस जीतने की भी है।
Disclaimer:
यह लेख उपलब्ध समाचार सामग्री और दिए गए विवरण के आधार पर स्वतंत्र रूप से तैयार किया गया है। इसमें किसी भी पक्ष के आरोप या दावों को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करने का उद्देश्य नहीं है। घटनाक्रम से संबंधित आधिकारिक जांच या नए तथ्यों के सामने आने के बाद स्थिति में बदलाव संभव है।
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