‘RAKSHA BANDHAN’ 2026: रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण, पंचक, भद्रा! राखी बांधने के लिए मिलेगा बस इतना समय

By: Abhinav kumar

On: Thursday, August 27, 2026 8:00 AM

'RAKSHA BANDHAN' 2026:
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RAKSHA BANDHAN 2026:  रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार और विश्वास से जुड़ा बेहद खास त्योहार है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई भी बहन की रक्षा का वचन देते हैं। लेकिन इस बार रक्षाबंधन का पर्व सामान्य दिनों से थोड़ा अलग रहने वाला है। सावन पूर्णिमा, चंद्र ग्रहण, पंचक और भद्रा जैसे कई संयोगों के कारण राखी बांधने के शुभ समय को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं।

ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के बताए पंचांग विवरण के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन से जुड़े मुहूर्त को समझना बेहद जरूरी है, ताकि भाई की कलाई पर राखी शुभ समय में बांधी जा सके।

रक्षाबंधन 2026 कब मनाया जाएगा?

रक्षाबंधन का पर्व सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 9 बजकर 9 मिनट से शुरू होने की जानकारी दी गई है। पूर्णिमा तिथि अगले दिन तक रहने के कारण राखी बांधने के समय को लेकर पंचांग की गणना महत्वपूर्ण हो जाती है।

यहां एक जरूरी बात यह है कि उपलब्ध जानकारी में 28 सितंबर की तारीख भी दी गई है, जबकि उसी विवरण में सावन पूर्णिमा की शुरुआत 27 अगस्त बताई गई है। इसलिए रक्षाबंधन की अंतिम तारीख और स्थानीय शुभ मुहूर्त के लिए अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया

इस बार रक्षाबंधन के आसपास चंद्र ग्रहण की चर्चा भी हो रही है। दिए गए विवरण के मुताबिक 28 अगस्त को साल का अंतिम चंद्र ग्रहण होने वाला है। इसकी अवधि सुबह 6 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक बताई गई है।

ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताओं में सूतक काल और शुभ कार्यों से संबंधित अलग-अलग नियम बताए जाते हैं। इसी कारण रक्षाबंधन के पर्व पर राखी बांधने के समय को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है।

हालांकि ग्रहण का प्रभाव हर स्थान पर एक जैसा दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। किसी क्षेत्र में ग्रहण दिखाई देने और न दिखाई देने के आधार पर धार्मिक परंपराओं में भी अंतर हो सकता है।

भद्रा काल में राखी बांधने को लेकर क्यों रहती है सावधानी?

रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू पंचांग की मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान कई शुभ कार्य करने से बचने की परंपरा रही है। खासकर राखी बांधने को लेकर भद्रा का समय महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसी वजह से बहनें अक्सर यह जानना चाहती हैं कि भद्रा कब शुरू होगी और कब समाप्त होगी। अगर रक्षाबंधन की तिथि पर भद्रा मौजूद हो, तो उसके समाप्त होने के बाद राखी बांधने को प्राथमिकता दी जाती है।

इस बार भी भद्रा की स्थिति को देखते हुए राखी बांधने का शुभ समय सीमित हो सकता है। इसलिए बिना समय देखे राखी बांधने के बजाय स्थानीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त को देखना ज्यादा उचित रहेगा।

पंचक का भी रहेगा असर?

रक्षाबंधन 2026 को लेकर पंचक की स्थिति की भी चर्चा है। धार्मिक मान्यताओं में पंचक को पांच नक्षत्रों से जुड़ी अवधि माना जाता है। इस दौरान कुछ विशेष कार्यों को लेकर सावधानी बरतने की परंपरा है।

हालांकि पंचक के दौरान राखी बांधना हर परंपरा में निषिद्ध माना जाए, ऐसा जरूरी नहीं है। अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराओं में इसके नियम और व्याख्या अलग हो सकती हैं। इसलिए केवल पंचक का नाम सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है।

राखी बांधने के लिए मिलेगा कितना समय?

इस बार ग्रहण, भद्रा और पंचक की चर्चाओं के कारण लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए शुभ समय कितना मिलेगा।

ज्योतिषीय गणना में शुभ मुहूर्त निकालते समय तिथि, नक्षत्र, भद्रा और ग्रहण जैसी स्थितियों को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए राखी बांधने का सही समय शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है।

ऐसे में सोशल मीडिया या अलग-अलग वेबसाइटों पर दिए गए समय को देखकर तुरंत निर्णय लेने के बजाय अपने शहर के पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

रक्षाबंधन का असली महत्व मुहूर्त से भी बड़ा है

रक्षाबंधन केवल शुभ-अशुभ समय देखने का त्योहार नहीं है। इसकी सबसे खूबसूरत बात भाई-बहन के बीच का वह रिश्ता है, जिसमें बचपन की शरारतें, छोटी-छोटी लड़ाइयां और एक-दूसरे के लिए गहरा अपनापन छिपा होता है।

बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो उसके पीछे सिर्फ एक धागा नहीं होता, बल्कि प्यार और विश्वास की भावना होती है। भाई भी बहन को यह भरोसा देता है कि जिंदगी के उतार-चढ़ाव में वह उसके साथ खड़ा रहेगा।

इसी भावनात्मक जुड़ाव की वजह से रक्षाबंधन हर साल परिवारों के लिए खास बन जाता है।

इस बार राखी बांधने से पहले क्या ध्यान रखें?

रक्षाबंधन 2026 में अगर आप शुभ मुहूर्त के अनुसार राखी बांधना चाहते हैं, तो अपने शहर के स्थानीय पंचांग में तिथि, भद्रा और ग्रहण की स्थिति जरूर जांच लें। खासकर ग्रहण दिखाई देने वाले क्षेत्रों में स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार नियम अलग हो सकते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि त्योहार को लेकर अनावश्यक डर या भ्रम न फैलाएं। पंचांग की गणना और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए परिवार की परंपरा के अनुसार त्योहार मनाया जा सकता है।

Disclaimer:

यह लेख उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी और ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर तैयार किया गया है। रक्षाबंधन की तिथि, भद्रा, पंचक, ग्रहण और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। ऊपर दी गई जानकारी को धार्मिक मान्यता के रूप में समझें, वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं। पूजा या शुभ कार्य के लिए अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग अथवा योग्य ज्योतिषाचार्य से स्थानीय समय की पुष्टि जरूर करें।

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Abhinav kumar

मेरा नाम अभिनव है और मैं Daily Sutra के लिए लेखन करता हूँ। मुझे टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, ई-स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट और लेटेस्ट न्यूज़ जैसे विषयों पर आर्टिकल लिखने का अनुभव है। मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि जानकारी आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद भाषा में प्रस्तुत करूँ, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके। मेरा फोकस पाठकों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुँचाने पर रहता है। डिजिटल मीडिया के लिए तथ्यात्मक और यूज़र-फ्रेंडली कंटेंट लिखना मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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