Bihar Board: मार्कशीट पर अब नहीं लिखा जाएगा ‘फेल’, छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका, शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदला

By: Abhinav kumar

On: Monday, August 31, 2026 11:00 AM

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Bihar Board: किसी बच्चे के लिए परीक्षा में असफल होना आसान अनुभव नहीं होता। अच्छे नंबर न आने पर जहां छात्र खुद निराश हो जाता है, वहीं परिवार और समाज का दबाव उसकी परेशानी को और बढ़ा देता है। कई बार मार्कशीट पर लिखा एक शब्द बच्चे के आत्मविश्वास को लंबे समय तक प्रभावित करता है। इसी सोच को बदलने की दिशा में बिहार बोर्ड ने छात्रों के हित में एक अहम कदम उठाया है। अब 10वीं और 12वीं की मार्कशीट में असफल होने वाले छात्रों के लिए ‘फेल’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

बिहार बोर्ड का यह फैसला सिर्फ एक शब्द हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे छात्रों के प्रति शिक्षा व्यवस्था के नजरिए को बदलने की कोशिश भी दिखाई देती है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा में असफल होने वाले विद्यार्थियों पर पड़ने वाले सामाजिक दबाव और मानसिक बोझ को कम करना है। साथ ही छात्रों को यह मौका देने की कोशिश की जा रही है कि वे एक परीक्षा के खराब परिणाम को अपने भविष्य का अंतिम फैसला न मानें।

मार्कशीट से हटेगा ‘फेल’ शब्द

बिहार बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा में सफलता हासिल नहीं कर पाने वाले छात्रों की मार्कशीट में अब सीधे ‘फेल’ शब्द नहीं लिखा जाएगा। इस पहल के पीछे यह सोच है कि किसी परीक्षा में असफलता को छात्र की पूरी क्षमता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

कई बार बच्चे किसी एक परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि उनमें आगे बढ़ने की क्षमता नहीं है। परीक्षा का दबाव, तैयारी की कमी, व्यक्तिगत परिस्थितियां या किसी विषय को समझने में परेशानी जैसे कई कारण परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में मार्कशीट पर ‘फेल’ शब्द लिखे जाने से छात्र को सामाजिक और भावनात्मक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

सरकार की कोशिश है कि इस तरह के नकारात्मक लेबल को कम किया जाए और छात्रों को अपनी गलतियों से सीखने तथा दोबारा प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

असफल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका

इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा छात्रों को आगे बढ़ने का दूसरा अवसर देना है। अगर कोई विद्यार्थी परीक्षा में सफल नहीं हो पाता है, तो उसके लिए आगे अपनी पढ़ाई सुधारने और दोबारा प्रयास करने का रास्ता खुला रहेगा।

इससे उन छात्रों को राहत मिल सकती है जो एक खराब परिणाम के बाद अपने भविष्य को लेकर परेशान हो जाते हैं। उन्हें यह समझने का अवसर मिलेगा कि एक परीक्षा में असफलता जिंदगी की अंतिम हार नहीं है। सही तैयारी और मेहनत के साथ वे दोबारा कोशिश कर सकते हैं।

छात्रों को दूसरा मौका देने की यह सोच शिक्षा व्यवस्था को केवल परिणाम आधारित बनाने के बजाय सीखने और सुधार की प्रक्रिया पर केंद्रित करने की दिशा में कदम माना जा सकता है।

सिर्फ पढ़ाई नहीं, स्किल पर भी रहेगा जोर

बिहार में शिक्षा को लेकर बदलाव केवल परीक्षा और मार्कशीट तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। सरकार अब छात्रों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ अलग-अलग गतिविधियों और नए कौशल से जोड़ने पर भी जोर दे रही है।

आज के समय में विद्यार्थियों के लिए सिर्फ किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं माना जाता। तकनीकी समझ, व्यावहारिक ज्ञान, कम्युनिकेशन और दूसरी स्किल्स भी उनके भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में छात्रों को पढ़ाई के साथ अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार नए कौशल सीखने का अवसर देना उनके करियर के लिए फायदेमंद हो सकता है।

इस बदलाव का मकसद यह है कि छात्र सिर्फ परीक्षा पास करने तक सीमित न रहें, बल्कि आगे की जिंदगी और करियर के लिए भी तैयार हों।

‘विद्या साथी’ ऐप से छात्रों को मिलेगी पढ़ाई में मदद

कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों की पढ़ाई को आसान बनाने के लिए सरकार ने ‘विद्या साथी’ ऐप शुरू करने की पहल भी की है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षकों से जोड़ने और पढ़ाई में सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।

किसी विषय को समझने में परेशानी होने पर छात्रों को मार्गदर्शन मिल सकेगा। डिजिटल माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संपर्क बढ़ाने की यह पहल खास तौर पर उन छात्रों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिन्हें पढ़ाई में अतिरिक्त सहायता की जरूरत होती है।

इस तरह बिहार में शिक्षा व्यवस्था को धीरे-धीरे डिजिटल सुविधाओं और कौशल विकास के साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

छात्रों के आत्मविश्वास के लिए क्यों जरूरी है यह बदलाव?

परीक्षा में असफल होने के बाद कई विद्यार्थी खुद को दूसरों से कम समझने लगते हैं। यही सोच उनके आगे के प्रदर्शन को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था का काम सिर्फ नंबर देना नहीं, बल्कि छात्रों को असफलता के बाद दोबारा खड़े होने का हौसला देना भी है।

मार्कशीट से ‘फेल’ शब्द हटाने का फैसला इसी दिशा में एक सकारात्मक संदेश देता है। इससे छात्रों को यह महसूस हो सकता है कि उनका एक परीक्षा परिणाम उनकी पूरी पहचान नहीं है। उन्हें अपनी कमियों को पहचानने, सुधार करने और फिर से प्रयास करने का अवसर मिलना चाहिए।

कुल मिलाकर, बिहार बोर्ड का यह फैसला छात्रों को असफलता के डर से बाहर निकालने और उन्हें भविष्य के लिए ज्यादा आत्मविश्वासी बनाने की कोशिश है। ‘फेल’ शब्द हटाना भले ही कागज पर छोटा बदलाव लगे, लेकिन किसी छात्र के मन पर इसका असर बड़ा हो सकता है। अगर इसके साथ बेहतर मार्गदर्शन, स्किल ट्रेनिंग और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी लगातार ध्यान दिया जाता है, तो यह पहल बिहार के विद्यार्थियों के भविष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

Disclaimer:

यह आर्टिकल उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर स्वतंत्र रूप से तैयार किया गया है। बिहार बोर्ड के नियम, मार्कशीट का प्रारूप और परीक्षा संबंधी प्रावधान समय के साथ बदल सकते हैं। छात्रों और अभिभावकों को अंतिम और ताजा जानकारी के लिए बिहार बोर्ड तथा संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक सूचनाओं को जरूर देखना चाहिए।

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Abhinav kumar

मेरा नाम अभिनव है और मैं Daily Sutra के लिए लेखन करता हूँ। मुझे टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, ई-स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट और लेटेस्ट न्यूज़ जैसे विषयों पर आर्टिकल लिखने का अनुभव है। मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि जानकारी आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद भाषा में प्रस्तुत करूँ, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके। मेरा फोकस पाठकों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुँचाने पर रहता है। डिजिटल मीडिया के लिए तथ्यात्मक और यूज़र-फ्रेंडली कंटेंट लिखना मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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