Krishna Janmashtami 2026 Live: आज देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी के मौके पर सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है। भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा से लेकर वृंदावन, द्वारका, बद्रीनाथ और दिल्ली तक मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। सुबह की मंगला आरती के साथ ही जन्माष्टमी के इस पावन पर्व का आगाज हो गया है। मंदिरों में घंटियों और शंख की गूंज के बीच भक्त कान्हा के दर्शन कर रहे हैं और पूरा वातावरण कृष्ण भक्ति में डूबा नजर आ रहा है।
मंगला आरती के साथ शुरू हुआ जन्माष्टमी का उत्सव
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सुबह की मंगला आरती का अपना विशेष महत्व होता है। आज भी कई प्रमुख मंदिरों में भोर होते ही भगवान श्रीकृष्ण की मंगला आरती की गई। आरती के दौरान मंदिरों में भक्तों की भारी मौजूदगी रही। भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन करते ही श्रद्धालुओं के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी।
मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण को नए वस्त्रों और आभूषणों से सजाया गया है। कहीं फूलों की आकर्षक सजावट की गई है तो कहीं रंग-बिरंगी रोशनी से मंदिर परिसर को बेहद खूबसूरत रूप दिया गया है। सुबह से ही भक्त भजन-कीर्तन करते हुए कान्हा की भक्ति में लीन दिखाई दे रहे हैं।
मथुरा में सुबह से भक्तों की भारी भीड़
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव बेहद खास माना जाता है। आज सुबह से ही यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दे रही है। भक्त भगवान के दर्शन करने और जन्मभूमि पर माथा टेकने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं।
मथुरा के प्रमुख मंदिरों में जन्माष्टमी को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। भक्तों के बीच जन्माष्टमी को लेकर इतना उत्साह है कि सुबह से ही धार्मिक स्थलों के आसपास चहल-पहल बढ़ गई है।
वृंदावन में भी कृष्ण भक्ति में डूबे श्रद्धालु
मथुरा के साथ-साथ वृंदावन में भी जन्माष्टमी का रंग देखते ही बन रहा है। कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी इस नगरी में अलग-अलग मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया गया है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है।
वृंदावन पहुंचने वाले श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन कर रहे हैं और भगवान कृष्ण के जयकारे लगा रहे हैं। जन्माष्टमी के कारण पूरे शहर में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे पूरा वृंदावन कान्हा की भक्ति में रंग गया हो।

द्वारका से बद्रीनाथ तक दिखी जन्माष्टमी की रौनक
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों में द्वारका का विशेष स्थान है। जन्माष्टमी के अवसर पर द्वारका में भी मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है। भक्त भगवान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।
वहीं बद्रीनाथ और देश के अन्य हिस्सों में भी जन्माष्टमी को लेकर उत्साह नजर आ रहा है। मंदिरों में विशेष पूजा, आरती और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में भी कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
उधमपुर में निकली भव्य शोभायात्रा
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में कृष्ण जन्माष्टमी से पहले भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सनातन सभा उधमपुर की ओर से आयोजित इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक झांकियों और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के बीच शोभायात्रा का माहौल भक्तिमय नजर आया।
श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ इस आयोजन में हिस्सा लिया। कृष्ण जन्माष्टमी से पहले निकाली गई इस शोभायात्रा ने लोगों के बीच पर्व को लेकर उत्साह और बढ़ा दिया।
आधी रात को होगा भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव
जन्माष्टमी के दिन भक्तों को सबसे ज्यादा इंतजार रात के उस खास पल का रहता है, जब भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था।
इसी वजह से जन्माष्टमी की रात मंदिरों में विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाता है। कई भक्त दिनभर उपवास रखते हैं और रात में भगवान के जन्म के बाद व्रत खोलते हैं। भगवान के बाल स्वरूप का अभिषेक किया जाता है और उन्हें झूले में विराजमान कराकर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
दही हांडी कार्यक्रमों में भी दिखेगा उत्साह
कृष्ण जन्माष्टमी के साथ दही हांडी का उत्सव भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और माखन चोरी की परंपरा से जुड़ा दही हांडी कार्यक्रम कई जगहों पर आयोजित किया जाता है।
इस दौरान युवा टोली बनाकर ऊंचाई पर लटकी मटकी फोड़ने की कोशिश करते हैं। दही हांडी के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और पूरा माहौल उत्सव में बदल जाता है। हालांकि ऐसे आयोजनों के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
भक्ति और भावनाओं से जुड़ा है जन्माष्टमी का पर्व
कृष्ण जन्माष्टमी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि आस्था और भावनाओं से जुड़ा पर्व है। भगवान श्रीकृष्ण को कोई बाल गोपाल के रूप में पूजता है तो कोई उन्हें अपना आराध्य और मार्गदर्शक मानता है। जन्माष्टमी के दिन मंदिरों में होने वाली विशेष पूजा, भजन, आरती और कृष्ण जन्म की झांकियां लोगों को आध्यात्मिक अनुभव कराती हैं।
आज सुबह मंगला आरती के साथ शुरू हुआ जन्माष्टमी का यह उत्सव दिनभर जारी रहेगा और रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ इसका मुख्य आयोजन होगा। मथुरा-वृंदावन से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों तक भक्त पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ कान्हा के जन्म का जश्न मनाने में जुटे हुए हैं। मंदिरों में गूंजते ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारे और भक्तों की आस्था इस पर्व को और भी खास बना रही है।
Disclaimer:
यह लेख उपलब्ध समाचार जानकारी और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के आधार पर तैयार किया गया है। पूजा-पद्धति, व्रत और शुभ मुहूर्त से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग पंचांग और परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती हैं। धार्मिक अनुष्ठान करने से पहले अपने स्थानीय विद्वान या प्रमाणित पंचांग की सलाह लेना उचित है।





