CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स का नाम सुनते ही खेल प्रेमियों के मन में रोमांच, बड़े मुकाबले और भारत के शानदार प्रदर्शन की तस्वीर उभर आती है। लेकिन इस बार कहानी थोड़ी अलग है। ग्लासगो में होने जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 कई मायनों में इतिहास रचने वाले हैं, मगर इसकी वजह रिकॉर्ड संख्या में खेल या खिलाड़ियों की भागीदारी नहीं, बल्कि इसका बेहद सीमित स्वरूप है। इस बार का आयोजन पिछले 32 वर्षों का सबसे छोटा कॉमनवेल्थ गेम्स बनने जा रहा है। सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि हॉकी, बैडमिंटन और रेसलिंग जैसे लोकप्रिय खेल इस बार कार्यक्रम का हिस्सा ही नहीं होंगे। ऐसे में करोड़ों खेल प्रेमियों के लिए यह फैसला निराशा लेकर आया है।
ग्लासगो में सिर्फ 10 खेलों के साथ होगा आयोजन
23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित होने वाला कॉमनवेल्थ गेम्स इस बार बेहद छोटे पैमाने पर आयोजित किया जा रहा है। जहां पिछले संस्करणों में 18 से 20 से अधिक खेल शामिल होते थे, वहीं इस बार केवल 10 खेलों में ही खिलाड़ियों के बीच मुकाबले होंगे।
यह बदलाव केवल संख्या का नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट की पहचान से जुड़ा हुआ है। कॉमनवेल्थ गेम्स हमेशा से विभिन्न खेलों का महाकुंभ माना जाता रहा है, लेकिन इस बार इसका स्वरूप काफी सीमित नजर आएगा।
हॉकी, बैडमिंटन और रेसलिंग की गैरमौजूदगी सबसे बड़ा झटका
भारत के लिहाज से सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिन खेलों में देश लगातार पदक जीतता रहा है, वे इस बार कार्यक्रम से बाहर हैं।
हॉकी में भारतीय टीम हमेशा मेडल की मजबूत दावेदार रहती है। बैडमिंटन में भारतीय खिलाड़ियों ने पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई है। वहीं रेसलिंग भी भारत के सबसे सफल खेलों में गिनी जाती है। इन तीनों खेलों के बाहर होने का सीधा असर भारत की संभावित पदक संख्या पर पड़ सकता है।
केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लाखों प्रशंसक भी इन लोकप्रिय खेलों को मिस करेंगे।

आखिर इतना छोटा क्यों हो गया कॉमनवेल्थ गेम्स?
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह आयोजन से जुड़ी आर्थिक चुनौतियां हैं।
दरअसल, 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी पहले ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य को मिली थी। अगस्त 2022 में मेजबानी मिलने के बाद तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं, लेकिन समय के साथ आयोजन की अनुमानित लागत तेजी से बढ़ने लगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक खर्च इतना अधिक हो गया कि विक्टोरिया सरकार ने आखिरकार इस आयोजन से खुद को अलग करने का फैसला किया। इसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स के सामने मेजबान शहर तलाशने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।
CWG 2026: जब कोई आगे नहीं आया, तब ग्लासगो बना सहारा
विक्टोरिया के हटने के बाद कई महीनों तक नया मेजबान नहीं मिल पाया। ऐसे में कॉमनवेल्थ गेम्स के भविष्य पर सवाल उठने लगे थे।
11 अप्रैल 2024 को आखिरकार ग्लासगो ने आगे आकर इस आयोजन की जिम्मेदारी स्वीकार की। हालांकि, सीमित समय और वित्तीय चुनौतियों को देखते हुए शहर ने साफ कर दिया कि वह केवल छोटे और किफायती मॉडल पर ही गेम्स आयोजित कर सकता है।
यही कारण है कि इस बार खेलों की संख्या में भारी कटौती की गई और पूरे आयोजन को पहले की तुलना में काफी छोटा रखा गया।
खर्च कम करने के लिए अपनाया गया नया मॉडल
ग्लासगो ने इस बार नई रणनीति अपनाई है। पहले से मौजूद स्टेडियमों और खेल सुविधाओं का अधिकतम उपयोग किया जाएगा ताकि नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च न करना पड़े।
आयोजकों का मानना है कि भविष्य में बड़े खेल आयोजनों को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए यह मॉडल एक उदाहरण बन सकता है। हालांकि, इसके बदले कई लोकप्रिय खेलों को कार्यक्रम से बाहर करना पड़ा।
भारत के लिए कैसी रहेगी चुनौती?
भारत हर कॉमनवेल्थ गेम्स में मजबूत प्रदर्शन करता रहा है। खासकर शूटिंग, वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, रेसलिंग, हॉकी और बॉक्सिंग जैसे खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार पदक जीते हैं।
इस बार हॉकी, बैडमिंटन और रेसलिंग जैसे खेलों के बाहर होने से भारत की पदक तालिका पर असर पड़ना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि जिन खेलों में प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी, उनमें भारतीय खिलाड़ी अपनी पूरी ताकत के साथ उतरेंगे और देश को नई सफलताएं दिलाने की कोशिश करेंगे।
क्या कॉमनवेल्थ गेम्स की चमक कम हो रही है?
खेल विशेषज्ञों के बीच इस बात पर चर्चा तेज है कि क्या कॉमनवेल्थ गेम्स धीरे-धीरे अपनी पुरानी पहचान खो रहा है। लगातार बढ़ती लागत, मेजबान शहरों की कमी और आयोजन की आर्थिक चुनौतियां इस प्रतियोगिता के भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े कर रही हैं।
हालांकि, दूसरी ओर कई विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे लेकिन व्यवस्थित आयोजन भविष्य का बेहतर रास्ता साबित हो सकते हैं। यदि खर्च नियंत्रित रहेगा तो अधिक शहर भविष्य में मेजबानी के लिए आगे आ सकते हैं।
खेल प्रेमियों की उम्मीदें अब भी बरकरार
भले ही इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स अपने छोटे स्वरूप की वजह से चर्चा में है, लेकिन खिलाड़ियों का जुनून और देश के लिए पदक जीतने का सपना पहले जैसा ही रहेगा।
ग्लासगो में होने वाला यह आयोजन यह भी बताएगा कि सीमित संसाधनों के साथ भी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन किया जा सकता है या नहीं। करोड़ों खेल प्रेमियों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह नया प्रयोग कितना सफल साबित होता है।
निष्कर्ष:
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। पिछले 32 वर्षों में पहली बार इतना छोटा आयोजन देखने को मिलेगा, जिसमें सिर्फ 10 खेल शामिल होंगे। हॉकी, बैडमिंटन और रेसलिंग जैसे लोकप्रिय खेलों की गैरमौजूदगी ने खेल प्रेमियों को जरूर निराश किया है, लेकिन इसके पीछे आर्थिक मजबूरियां और आयोजन को बचाने की कोशिश सबसे बड़ा कारण रही हैं। अब सभी की नजरें ग्लासगो पर हैं, जहां यह तय होगा कि सीमित संसाधनों के बावजूद क्या कॉमनवेल्थ गेम्स अपनी प्रतिष्ठा और रोमांच को बरकरार रख पाता है।
Disclaimer:
यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। आयोजन से जुड़ी जानकारी, खेलों की सूची या कार्यक्रम में समय-समय पर आधिकारिक स्तर पर बदलाव संभव हैं। नवीनतम और प्रमाणिक जानकारी के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़े आधिकारिक स्रोतों को देखें।





