RBI भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) लेन-देन से जबरदस्त कमाई की है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और रुपये में आई कमजोरी के बावजूद RBI ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। इससे देश की आर्थिक स्थिरता और केंद्रीय बैंक की मजबूत रणनीति दोनों का पता चलता है।
विदेशी मुद्रा सौदों से RBI की कमाई में बड़ी छलांग
RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में विदेशी मुद्रा लेन-देन से होने वाला लाभ बढ़कर 1.69 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 1.11 लाख करोड़ रुपये था। यानी एक साल के भीतर इसमें करीब 52 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई।
विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए RBI ने वर्ष के दौरान स्पॉट मार्केट में कुल 195 अरब डॉलर की बिक्री की। केंद्रीय बैंक के इन कदमों ने बाजार में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रुपये में गिरावट का भी पड़ा असर
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय रुपया लगभग 9.85 प्रतिशत कमजोर हुआ। मार्च महीने में पश्चिम एशिया में शुरू हुए युद्ध के बाद रुपया करीब 4 प्रतिशत तक फिसल गया था। इस अस्थिरता का असर RBI के फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स पर भी देखने को मिला।
31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स की मार्क-टू-मार्केट वैल्यूएशन में RBI को 43,403 करोड़ रुपये का शुद्ध अवास्तविक नुकसान हुआ। इससे पहले 31 मार्च 2025 को इसी मद में 6,985 करोड़ रुपये का अवास्तविक लाभ दर्ज किया गया था।
पहली बार फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स में बड़ा नुकसान
पिछले कम से कम पांच वर्षों में पहली बार RBI को अपने बकाया फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स पर शुद्ध मार्क-टू-मार्केट नुकसान दर्ज करना पड़ा। हालांकि केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि मौजूदा लेखा नीति के तहत इस नुकसान को कंटिजेंसी फंड के जरिए समायोजित किया गया और नए वित्त वर्ष के पहले कार्य दिवस पर इसे वापस कर दिया गया।
मार्च 2026 तक RBI की नेट शॉर्ट फॉरवर्ड पोजिशन बढ़कर 103.06 अरब डॉलर हो गई, जबकि एक साल पहले यह 84.3 अरब डॉलर थी।
RBI की बैलेंस शीट में जबरदस्त विस्तार
वित्त वर्ष 2025-26 में RBI की कुल बैलेंस शीट 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस वृद्धि के पीछे घरेलू निवेश, विदेशी निवेश और सोने के भंडार में हुई बढ़ोतरी मुख्य कारण रही।
घरेलू निवेश में 44.9 प्रतिशत, सोने में 63.8 प्रतिशत और विदेशी निवेश में 7.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं देनदारियों की ओर देखें तो पुनर्मूल्यांकन खातों, जारी नोटों और जमा राशियों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

आय में बढ़ोतरी, खर्च में सीमित वृद्धि
RBI की कुल आय वित्त वर्ष 2025-26 में 26.4 प्रतिशत बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये हो गई। दूसरी ओर खर्च केवल 7.8 प्रतिशत बढ़कर 50,995 करोड़ रुपये तक पहुंचा। यह दिखाता है कि केंद्रीय बैंक ने अपनी आय को तेजी से बढ़ाने में सफलता हासिल की है।
इसके अलावा RBI ने 1.09 लाख करोड़ रुपये की राशि कंटिजेंसी फंड में स्थानांतरित की, जिससे भविष्य के संभावित जोखिमों से निपटने की क्षमता और मजबूत हुई है।
सोने के भंडार ने बढ़ाई ताकत
31 मार्च 2026 तक RBI के पास कुल 880.52 टन सोना मौजूद था। सोने की कीमतों में आई तेजी के कारण इसके मूल्य में भारी उछाल देखा गया। RBI के इश्यू डिपार्टमेंट में रखे गए सोने का मूल्य एक साल में 64.1 प्रतिशत बढ़कर 3.88 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इसके साथ ही करेंसी एंड गोल्ड रीवैल्यूएशन अकाउंट (CGRA) का बैलेंस भी बढ़कर 21.69 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 13.03 लाख करोड़ रुपये था।
निष्कर्ष
RBI की वार्षिक रिपोर्ट यह संकेत देती है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और रुपये पर दबाव के बावजूद भारतीय केंद्रीय बैंक ने अपने वित्तीय संसाधनों को मजबूत बनाने में सफलता हासिल की है। विदेशी मुद्रा सौदों से रिकॉर्ड मुनाफा, बढ़ती आय, मजबूत बैलेंस शीट और सोने के बढ़ते भंडार भारत की आर्थिक मजबूती का सकारात्मक संकेत देते हैं। आने वाले समय में ये कारक देश की वित्तीय स्थिरता को और मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।
Disclaimer:
यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट और सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। निवेश या वित्तीय निर्णय लेने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
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