Hartalika Teej 2026: 3 साल बाद बन रहा शुभ संयोग, तीज पर भूलकर भी न करें ये 5 काम

By: Abhinav kumar

On: Thursday, September 10, 2026 2:00 PM

Hartalika Teej 2026:
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Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का दिन सुहागिन महिलाओं के लिए सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और वैवाहिक सुख से जुड़ा बेहद खास पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। यही वजह है कि हरतालिका तीज का इंतजार महिलाओं को पूरे साल रहता है।

साल 2026 में भी हरतालिका तीज को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बार यह पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं इस बार करीब तीन साल बाद एक विशेष शुभ संयोग बनने की बात कही जा रही है, जिसके कारण इस तीज का महत्व और भी बढ़ गया है।

हालांकि इस पवित्र दिन पूजा-पाठ और व्रत के साथ कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज के दिन कुछ ऐसे काम हैं जिन्हें करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत की पवित्रता और पूजा का सकारात्मक प्रभाव बना रहता है।

हरतालिका तीज 2026 कब मनाई जाएगी?

हरतालिका तीज हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होने की जानकारी दी गई है। उदया तिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा।

इस दिन महिलाएं सुबह से ही व्रत और पूजा की तैयारियों में जुट जाती हैं। कई जगहों पर महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं।

Hartalika Teej 2026:

तीन साल बाद शुभ संयोग से बढ़ा पर्व का महत्व

हरतालिका तीज को लेकर इस साल एक विशेष शुभ संयोग की चर्चा है। धार्मिक मान्यताओं में शुभ योगों को पूजा और व्रत के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। ऐसे में तीन साल बाद बन रहे इस संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह और बढ़ गया है।

मान्यता है कि हरतालिका तीज के दिन पूरे मन से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सुख-शांति बनी रहती है। अविवाहित महिलाएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए यह व्रत करती हैं।

तीज के दिन काले रंग से क्यों बचने की मान्यता है?

हरतालिका तीज के दिन महिलाओं के लिए रंगों का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में काले रंग को इस पर्व के लिए शुभ नहीं माना जाता। इसलिए सुहागिन महिलाओं को इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने या काले रंग की श्रृंगार सामग्री का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है।

तीज जैसे शुभ अवसर पर लाल, हरा, पीला और गुलाबी जैसे पारंपरिक रंगों को अधिक शुभ माना जाता है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में परंपराएं अलग हो सकती हैं।

पति के साथ विवाद करने से बचें

हरतालिका तीज का व्रत मन की शांति और भगवान शिव-पार्वती के प्रति श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस दिन पति या परिवार के किसी सदस्य के साथ बेवजह विवाद करने से बचने की धार्मिक मान्यता है।

व्रत के दौरान मन को शांत रखना और सकारात्मक विचारों पर ध्यान देना बेहतर माना जाता है। क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और तनाव जैसी भावनाओं से दूर रहकर यदि भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान किया जाए तो मन को भी शांति मिलती है।

पूजा के दौरान जल्दबाजी न करें

हरतालिका तीज की पूजा को श्रद्धा और धैर्य के साथ करना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा के दौरान जल्दबाजी करना या बिना ध्यान लगाए केवल औपचारिकता पूरी करना उचित नहीं माना जाता। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करें।

तीज के दिन महिलाएं मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं बनाकर भी पूजा करती हैं। इसके बाद उन्हें पारंपरिक तरीके से पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।

व्रत के दौरान मन में नकारात्मक विचार न लाएं

हरतालिका तीज का व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में शरीर के साथ मन का संयम भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

व्रत के दौरान नकारात्मक बातें सोचने, किसी के प्रति मन में द्वेष रखने या दूसरों की निंदा करने से बचना चाहिए। इस दिन अपना अधिक से अधिक समय पूजा, भजन और भगवान के स्मरण में लगाने की परंपरा है।

हालांकि स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या हो तो निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। आस्था के साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

सुहाग की चीजों का अपमान न करें

हरतालिका तीज सुहाग और दांपत्य सुख से जुड़ा पर्व है। इस दिन सुहाग की वस्तुओं को विशेष महत्व दिया जाता है। इसलिए सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी और अन्य श्रृंगार सामग्री का अनादर करने से बचने की मान्यता है।

कई महिलाएं इस दिन माता पार्वती को भी सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र तथा परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं।

भगवान शिव और माता पार्वती की कथा जरूर सुनें

हरतालिका तीज की पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती की कथा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी तपस्या और दृढ़ संकल्प से जुड़ी कथा हरतालिका तीज के धार्मिक महत्व को दर्शाती है।

इसलिए पूजा के दौरान शिव-पार्वती की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। इससे पूजा के प्रति श्रद्धा और भी गहरी होती है और महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन के लिए भगवान से आशीर्वाद मांगती हैं।

इस तीज पर रखें श्रद्धा और सकारात्मकता

हरतालिका तीज सिर्फ कठिन व्रत रखने का नाम नहीं है। यह पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना को मजबूत करने वाला पर्व भी माना जाता है। इसलिए इस दिन दिखावे से ज्यादा जरूरी मन में श्रद्धा रखना है।

अगर आप भी इस साल हरतालिका तीज का व्रत रखने जा रही हैं तो भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए पूरे मन से पूजा करें। घर में शांत और सकारात्मक माहौल बनाए रखें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए इस पवित्र पर्व को श्रद्धा और खुशी के साथ मनाएं।

Disclaimer:

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा-विधि तथा मान्यताएं अलग हो सकती हैं। इसे किसी चिकित्सकीय या वैज्ञानिक सलाह के रूप में न लें। व्रत के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।

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Abhinav kumar

मेरा नाम अभिनव है और मैं Daily Sutra के लिए लेखन करता हूँ। मुझे टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, ई-स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट और लेटेस्ट न्यूज़ जैसे विषयों पर आर्टिकल लिखने का अनुभव है। मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि जानकारी आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद भाषा में प्रस्तुत करूँ, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके। मेरा फोकस पाठकों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुँचाने पर रहता है। डिजिटल मीडिया के लिए तथ्यात्मक और यूज़र-फ्रेंडली कंटेंट लिखना मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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