आजादी से पहले की ये 7 भारतीय कंपनियां, आज भी दुनिया में बजा रही हैं डंका

By: Abhinav kumar

On: Saturday, August 15, 2026 11:00 AM

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आजादी से पहले की ये 7 भारतीय कंपनियां, 15 अगस्त सिर्फ तिरंगे, देशभक्ति के गीतों और आजादी के जश्न का दिन नहीं है। यह उन लोगों और संस्थानों को याद करने का भी मौका है, जिन्होंने गुलामी के दौर में मुश्किल हालात के बीच भारत की नींव मजबूत करने का काम किया। जब देश में कारोबार करना आसान नहीं था और विदेशी कंपनियों का दबदबा था, तब कुछ भारतीय कारोबारियों ने अपने सपनों को हकीकत में बदलने की शुरुआत की।

दिलचस्प बात यह है कि आजादी से पहले शुरू हुई कई भारतीय कंपनियां आज भी मजबूती से खड़ी हैं। इनमें से कुछ कंपनियां भारत से निकलकर दुनिया के बाजारों में अपनी पहचान बना चुकी हैं। इनके सफर में संघर्ष, दूरदर्शिता और बदलते समय के साथ खुद को ढालने की कहानी छिपी है।

Tata समूह: कारोबार से लेकर एविएशन तक लंबा सफर

भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में टाटा समूह का नाम बेहद खास है। इसकी शुरुआत 1868 में जमशेदजी टाटा ने की थी। उस दौर में भारतीय कारोबारियों के लिए आगे बढ़ना आसान नहीं था, लेकिन टाटा समूह ने धीरे-धीरे देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समय के साथ यह समूह स्टील, ऑटोमोबाइल, आईटी, होटल, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और एविएशन जैसे कई क्षेत्रों में फैल गया। आज टाटा समूह की कंपनियां भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में कारोबार करती हैं। टाटा मोटर्स के पास Jaguar और Land Rover जैसे वैश्विक ऑटोमोबाइल ब्रांड भी हैं।

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Godrej: घर-घर पहुंचा भरोसे का नाम

1897 में शुरू हुआ Godrej समूह भी आजादी से पहले की उन भारतीय कंपनियों में शामिल है, जिसने लंबे समय तक भारतीय उपभोक्ताओं का भरोसा कायम रखा है। अरदेशिर गोदरेज और पिरोजशा गोदरेज ने इसकी नींव रखी थी।

शुरुआत में कंपनी ने साबुन और अन्य उत्पादों से अपना सफर आगे बढ़ाया। बाद में Godrej ने होम अप्लायंसेज, फर्नीचर, पर्सनल केयर और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार किया। आज Godrej का नाम भारतीय घरों में जाना-पहचाना है और इसके कई उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच चुके हैं।

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Dabur: आयुर्वेद से दुनिया तक

Dabur की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। इसकी शुरुआत 1884 में डॉ. एस.के. बर्मन ने की थी। उन्होंने आयुर्वेदिक दवाओं और स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों के जरिए कारोबार की शुरुआत की।

वक्त के साथ Dabur ने अपने पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार ढाला। आज कंपनी हेल्थकेयर, पर्सनल केयर, फूड और अन्य FMCG उत्पादों के लिए जानी जाती है। भारत के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी Dabur के उत्पाद पहुंचते हैं।

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Britannia: बिस्कुट से बनी पहचान

1892 में शुरू हुई Britannia की कहानी भारतीय खाद्य उद्योग के विकास से जुड़ी हुई है। शुरुआत में कंपनी का कारोबार सीमित था, लेकिन समय के साथ इसके बिस्कुट और अन्य खाद्य उत्पाद भारतीय बाजार का हिस्सा बन गए।

आज Britannia का नाम लगभग हर भारतीय घर में पहचाना जाता है। कंपनी बिस्कुट के अलावा ब्रेड, केक, रस्क और डेयरी से जुड़े उत्पाद भी बनाती है। इसकी पहचान अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है और इसके उत्पाद कई देशों में उपलब्ध हैं।

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ITC: तंबाकू से FMCG तक का बड़ा बदलाव

ITC की स्थापना 1910 में हुई थी। कंपनी का शुरुआती कारोबार तंबाकू और सिगरेट से जुड़ा था, लेकिन समय के साथ ITC ने अपने कारोबार में बड़ा बदलाव किया।

आज कंपनी FMCG, होटल, पेपरबोर्ड, पैकेजिंग और एग्री-बिजनेस जैसे कई क्षेत्रों में मौजूद है। Aashirvaad, Sunfeast और Classmate जैसे ब्रांडों ने ITC को भारतीय उपभोक्ता बाजार में मजबूत पहचान दिलाई है।

Bajaj Group: दोपहिया वाहनों से बनी पहचान

Bajaj Group की शुरुआत 1926 में जमनालाल बजाज ने की थी। आज यह समूह ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय है।

खासकर Bajaj के दोपहिया वाहन भारतीय सड़कों पर लंबे समय से नजर आते रहे हैं। समय के साथ कंपनी ने भारतीय बाजार के अलावा विदेशी बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई। Bajaj का सफर यह दिखाता है कि एक पुराना कारोबार बदलते दौर में नई तकनीक और नए बाजारों के साथ खुद को कैसे आगे बढ़ा सकता है।

Mahindra Group: आजादी से पहले शुरू हुआ सफर

Mahindra Group की शुरुआत 1945 में हुई थी। यानी भारत की आजादी से ठीक दो साल पहले। भाइयों जे.सी. महिंद्रा और के.सी. महिंद्रा तथा उनके सहयोगी गुलाम मोहम्मद ने इसकी नींव रखी थी।

शुरुआत में कंपनी का कारोबार स्टील से जुड़ा था, लेकिन बाद में Mahindra ने ऑटोमोबाइल, कृषि उपकरण, फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और अन्य क्षेत्रों में विस्तार किया। आज Mahindra का नाम भारत के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी जाना जाता है।

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इन कंपनियों की कहानी सिर्फ कारोबार की नहीं है

इन कंपनियों की सबसे खास बात सिर्फ यह नहीं है कि ये आज भी अस्तित्व में हैं। असली बात यह है कि इन्होंने बदलते भारत के साथ खुद को भी बदला। जिस दौर में देश विदेशी शासन के अधीन था, उस समय शुरू हुए इन कारोबारों ने दशकों के उतार-चढ़ाव, आर्थिक बदलाव और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना किया।

आज जब भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह मजबूत कर रहा है, तब इन कंपनियों का इतिहास हमें यह याद दिलाता है कि बड़े सपनों की उम्र नहीं होती। सही सोच, मेहनत और समय के साथ बदलाव करने की क्षमता किसी भी कारोबार को पीढ़ियों तक जिंदा रख सकती है।

Disclaimer:

यह लेख उपलब्ध ऐतिहासिक और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। कंपनियों की स्थापना, कारोबार और ब्रांड से जुड़ी जानकारी समय के साथ बदल सकती है। निवेश या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय स्रोतों की जांच जरूर करें।

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Abhinav kumar

मेरा नाम अभिनव है और मैं Daily Sutra के लिए लेखन करता हूँ। मुझे टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, ई-स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट और लेटेस्ट न्यूज़ जैसे विषयों पर आर्टिकल लिखने का अनुभव है। मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि जानकारी आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद भाषा में प्रस्तुत करूँ, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके। मेरा फोकस पाठकों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुँचाने पर रहता है। डिजिटल मीडिया के लिए तथ्यात्मक और यूज़र-फ्रेंडली कंटेंट लिखना मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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