Awarapan 2 Review: थिएटर में बैठते ही ‘आवारापन 2’ आपको सिर्फ एक फिल्म देखने का एहसास नहीं कराती, बल्कि धीरे-धीरे उस दौर में ले जाती है, जब इमरान हाशमी की फिल्मों के गाने, दर्द भरी प्रेम कहानियां और गहरी आंखों वाले किरदार दर्शकों के दिल पर राज करते थे। फिल्म में 2000 के दशक की वही पुरानी खुशबू महसूस होती है, लेकिन कहानी और किरदारों को आज के समय के हिसाब से पेश करने की कोशिश भी की गई है।
इमरान हाशमी ने फिर जगाई पुरानी यादें
‘आवारापन 2’ की सबसे बड़ी खासियत इमरान हाशमी हैं। शिवम के किरदार में वह एक ऐसे इंसान नजर आते हैं, जिसके भीतर प्यार, दर्द, गुस्सा और अपनी गलतियों का बोझ एक साथ मौजूद है। उनका किरदार देखकर कई जगह आपको उनके पुराने दौर की याद जरूर आएगी, लेकिन इस बार इमरान सिर्फ अपने पुराने ‘सीरियल किसर’ वाले अंदाज पर निर्भर नहीं रहते।
उनके अभिनय में एक ठहराव दिखाई देता है। वह कम बोलकर भी अपने चेहरे और आंखों से काफी कुछ कह जाते हैं। यही बात उनके किरदार को भावनात्मक बनाती है और फिल्म को सिर्फ एक साधारण गैंगस्टर या लव स्टोरी बनने से बचाती है।
कहानी में प्यार के साथ छिपा है बड़ा रहस्य
फिल्म की कहानी शिवम के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी में आलिया के आने से सब कुछ बदल जाता है। शुरुआत में कहानी एक भावुक रिश्ते की तरह आगे बढ़ती है, लेकिन जल्द ही इसमें एक बड़ा रहस्य सामने आता है।
शिवम को इंटरपोल से पता चलता है कि आलिया को गोद लेने के पीछे मामला उतना सीधा नहीं है, जितना दिखाई देता है। इसके पीछे चाइल्ड ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर अपराध से जुड़ा एक बड़ा जाल सामने आता है। इसके बाद कहानी भावनात्मक रिश्ते से निकलकर अपराध और इंसाफ की दिशा में बढ़ने लगती है।
यही मोड़ फिल्म में रोमांच पैदा करता है और दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखता है।
शबाना का अलग अंदाज करता है प्रभावित
फिल्म में शबाना का किरदार भी काफी अलग और दिलचस्प है। गैंगस्टर के रूप में उनका अंदाज फिल्म को एक नया रंग देता है। उनके अनुभव और स्क्रीन प्रेजेंस का फायदा किरदार को मिलता है और कई दृश्यों में वह अपनी मौजूदगी से कहानी पर प्रभाव छोड़ती हैं।
उनका किरदार सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं लगता, बल्कि फिल्म के अपराध वाले पक्ष को मजबूती देने का काम करता है।

म्यूजिक है फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
अगर ‘आवारापन 2’ की किसी एक चीज को सबसे ज्यादा याद किया जाएगा, तो वह इसका संगीत है। फिल्म के गाने कहानी के भावनात्मक हिस्से को और मजबूत बनाते हैं। खासकर ‘Tera Mera Rishta’ जैसे गाने पुराने दर्शकों के भीतर तुरंत नॉस्टैल्जिया पैदा करते हैं।
कई बार ऐसा लगता है कि फिल्म की कहानी से ज्यादा उसके गाने आपको अपने पुराने दिनों की याद दिला रहे हैं। यही संगीत फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी बनकर सामने आता है।
क्या फिल्म देखने लायक है?
‘आवारापन 2’ उन दर्शकों के लिए खास अनुभव हो सकती है, जिन्होंने 2000 के दशक में इमरान हाशमी की फिल्मों और उनके संगीत को पसंद किया था। फिल्म में पुरानी शैली का रोमांस, दर्द, अपराध और संगीत का मिश्रण देखने को मिलता है। हालांकि, यही पुराना अंदाज कुछ दर्शकों को थोड़ा आउटडेटेड भी लग सकता है। कहानी में गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन कुछ जगह फिल्म अपनी पुरानी शैली से बाहर निकलने में संघर्ष करती दिखाई देती है। फिर भी इमरान हाशमी का अभिनय, शबाना का किरदार और शानदार संगीत फिल्म को संभाल लेते हैं।
कुल मिलाकर ‘आवारापन 2’ एक ऐसी फिल्म है जो नई कहानी के साथ पुराने बॉलीवुड का एहसास वापस लाने की कोशिश करती है। यह हर दर्शक के लिए परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन अगर आपको इमरान हाशमी का पुराना दौर, दर्द भरे गाने और इमोशनल लव स्टोरी पसंद रही हैं, तो यह फिल्म आपको थिएटर में कुछ पल के लिए अपने पुराने दिनों में जरूर पहुंचा सकती है।
Disclaimer:
यह फिल्म रिव्यू उपलब्ध कराई गई कहानी, किरदारों और फिल्म से जुड़ी जानकारी के आधार पर लिखा गया स्वतंत्र लेख है। इसमें व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं। फिल्म देखने के बाद आपकी राय इससे अलग हो सकती है।
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